करम पर्व

करम परब पर निबंध | खोरठा भाषा में करम पर्व पर निबंध|Du Dair Jirhul Phool notes

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करम परब पर निबंध

करम परब भादोक इंजोरिया एकादसिक राइते मनवल जाहे । ई अवसरे भाय सब के ससुराइर से लियावन करी के लानहथ , काहे कि ओहे करमइतिन हेवहथ ।अइसे करमइतिन डंगुवा बिहाहल बेटी छउवा आर कुँवार बेटी छउवा हेवहथ ।ई करम परब तइयारी कहुं पाँच  दिन तो कहुँ सात दिन पहिल से सुरू हेवहे आर ऊ बिधान कर नाम लागे जावा उठावेक । जावा उठावे खातिर नावां बांसेक डाला किनल जाहे ,जकर में जावा उठवेक दिने नदी धाइर जाइके नहाए –धोय के बाला उठावे  खातिर नावाँ बांसेक डाला किनल जाहे ,जकर में जावा उठवेक दिने नदी धाइर जाइके नहाय-धोय के बाला उठव हथ मगुर जहाँ नदी नखे  , हुवां गाढ़ा इया पोखइर धाइरो चलहे ।

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एकर में एगो मुइख डलइतिन  हेवहिक ,जकरा पूरा नियम – संयम से रहे पड़हे । ई डालाञ बाला उठावल बादे ,जऊ ,धान ,बूट ,उरीद ,कुरथिक ,गोटा ,बुनल जाहे ।डाला मुइख डलइतिन घारे राखल जाहे जकरा राइते खाइल बादे अखराञ लेइ जाय के जगवल जाहे । माने गीत गाय-गाय के बेहीवल जाहे । उपासेक पहिल दिन संजोत करल जाहे ।उपासेक  दिने पाँच  झिक जावा जगवल जाहे । सांइझ पहर नहाय धोय के धानेक पतय तोरल जाहे,जकरा फूल लोर्हा कहल जाहे ।सांइझे पहान बोन से दूगो करम – डाइर लानहे आर अखराञ गाड़हे ।फिन हाँक पारल जाहे तबे करमइतिन  धारीञ दीया  ,खीरा ,अंकरी-बंटरी इयानी पूजाक सामान लेइ के अखरा  पोंहचहथ आर करम डाइर के पूजहथ,दूध ढ़ार हथ । ओखिन के करमा – धरमाक कहनी सुनावल जाहे । दोसर दिन बिहाने बहिन – भाय के अंकुरल बूट आर कुरथी खाइले देहे ,एकरा अंकरी –बंटरी कहल जाहे । खीरा भाय के खाय ले नाञ् देल जाहे काहे कि ई ओकर भगिना हेव  हे “ खीरा ” करमइतिन  कर बेटा मानल जाहे ,से ले खीरा बाप –पितिया के खाय ले देल जाहे । दिन भइर रीझ – रंग ,झूमइर नाचल जाहे आर सांइझ पहर  करम डाइर के कोनो बोहइत पानी मे भंसवल जोहे ,जकरा करम भसावल कहल जाहे । ई तो करम परब कर संक्षिप्त रूप हे।

ई करम परब कर पाछु ढेर लोक बिसुवास आर  मायन्ता । एकादसीक दिने खेते इन्द गाडल जाहे ,ई इन्द माने भेलवा इया केइन्द कर छोट-छोट डाइर नीयर गाडल जाहे । एकर पाछु मान्यता हे कि खेते ककरो नजइर नी लागे ।

जे बा हे मगुर ई भाय – बहिन कर  अमर प्रेम कर परब लागे ज रकम – रकम कर गीत से भाव झलके हे ।ई परबे करम डाइर कर पूजन परबों हे ।अइसे झारखण्डे सरहुल आर करम दुइयो प्रकृति पूजन तेवहार लागे ।

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