सौरिया पहाड़िया जनजाति

सौरिया पहाड़िया जनजाति |Sauria Paharia Tribe|Sauria Pahadiya janjati

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सौरिया पहाड़िया जनजाति

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सौरिया पहाड़िया जनजाति का परिचय ,Introduction to the Sauria Paharia tribe,Sauria Paharia janjati ka parichaya,सौरिया पहाड़िया आदिम जनजाति

पहाड़िया जनजाति की दूसरी शाखा को सौरिया पहाड़िया जनजाति के नाम से जाना जाता है। यह झारखंड की आदिम जनजाति है ,यह अपने को मलेर कहते हैं। प्रजातीय दृष्टि से इन्हें प्रोटो -आस्ट्रोलायड श्रेणी में रखा जाता है। इनकी भाषा मालतो है, जो द्रविड़ भाषा परिवार से संबंधित है । मालतो भाषा उराँवं भाषा कुड़ुख से काफी मिलती-जुलती है।ये मुख्य रूप से संथाल परगना साहिबगंज , पाकुड़ जामताड़ा गोड्डा और देवघर जिले में निवास करते हैं ।सौरिया पहाड़िया के गांव प्रायः पहाड़ियों की चोटियों तथा वनाच्छिदत पहाड़ी ढलानों पर अवस्थित है ,इनके आवासों को “ अड्डा ” कहा जाता है।

सौरिया पहाड़िया जनजाति की जनगणना(Census of Sauria Paharia Tribe)

सौरिया पहाड़िया जनजाति की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 46222 है,जो राज्य की जनजातिय 0.53 % है ।

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सौरिया पहाड़िया जनजाति की अर्थव्यवस्था (Economy of Sauria Paharia Tribe)

सौरिया पहाड़िया जनजाति की अर्थव्यवस्था कृषि एवं वन पर आश्रित है। ये स्थानान्तरित कृषि ( कुरवा ) का कार्य भी करते हैं। इसके अतिरिक्त ये लांगल खेती या हलवाही एवं सवाई खेती करते हैं ।ढाल पर बसे लोग जोत कोड़कर खेती करते हैं जिसे “भिठा या धामी ” कहते है। गौ मांस भझण के कारण इन्हे मालपहाड़िया अपवित्र मानते है ।

सौरिया पहाड़िया जनजाति की महत्वपूर्ण विशेषता (Important feature of Sauria Paharia tribe)

सौरिया पहाड़िया जनजाति अंतर्विवाही समुदाय है।इनके बीच गोत्र नही पाया जाता है।

विवाह कार्यक्रम का संचालन ” वेदू सीढ़ू “ ( पुरोहित ) करता है।

सौरिया पहाड़िया जनजाति में शव को दफनाने की प्रथा है।इनका युवागृह “कोड़बाह ” या “ कोड़वाहा अड्डा “कहलाता है,युवको के लिए “मर्समक कोडबाह ” होते हैं और युवतियों के लिए “पेलमक कोडबाह “होतें हैं ,जहाँ युवक युवतियाँ को समाजिक ,सांस्कृतिक ,धार्मिक ,एवं आर्थिक जीवन के पक्षों की जानकारी परंपरागत अनौपचारिक शिक्षा के माध्यम से दी जाती है।

सौरिया पहाड़िया जनजाति के धार्मिक जीवन ( Religious life of Sauria Paharia tribe )

सौरिया पहाड़िया जनजाति के धार्मिक जीवन में पूर्वज पूजा का महत्वपूर्ण स्थान है ।इनके मुख्य देवता बेरू गोसाई (सूर्य) ,बिल्प गोसाई (चाँद) ,लैहू गोसाई(सृष्टिकर्त्ता) ,दरमारे गोसाई (सत्य देव) ,जरमात्रे गोसाई(जन्मदेव ), आदि है । लैहू गोसाई सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वशक्तिमान का देवता है।पो गोसाई राजमार्ग का देवता है,तथा औटगा शिकार का देवता है।धार्मिक कार्यों का संचालन “कान्दो मांक्षी ” करता है।कोतवार एवं चालवे उसकी सयता करते हैं,जाहेरथान में चाल गोसाई की पूजा की जाती है,फसल से सम्बंधितये भादो में गांगी अड़या ,कार्तिकमें ओसरा आड़या ,तथा पूस मे पूनू आड़या पर्व मनाते है।माघ या चैत में सौरिया पहाड़िया जनजाति की सलियानी पूजा की जाती है।

Q. सौरिया पहाड़िया जनजाति किस भाषा परिवार से संबंधित है ?

Ans= द्रविड़ भाषा परिवार

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