सेंटिनलीज जनजाति | Sentinelese Tribe

सेंटिनलीज जनजाति

यह जनजाति एक प्रतिबंधित उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर रहने वाली एक नेग्रिटो जनजाति है। 2011 के जनगणना आँकड़ों के अनुसार द्वीप पर इनकी संख्या 15 के आस-पास थी। जहाँ एक तरफ अंडमान द्वीप में चार नेग्रिटो जनजातियों- ग्रेट अंडमानी, ओंगे/ओंज, जारवा तथा सेंटिनलीज का निवास है तो वहीं दूसरी तरफ निकोबार में दो मंगोलॉइड जनजातियाँ मसलन- निकोबारी और शोम्पेन … Read more

 खोरठा भाषा में अनुच्छेद लेख

खोरठा भाषा में अनुच्छेद लेख

खोरठा भाषा में अनुच्छेद लेखन क्या है

आजकल विभिन्न परीक्षाओ एवं प्रतियोगिता परीक्षाओं में क्षेत्रिय एवं जनजातीय भाषा में अनुच्छेद लिखने के लिए कहें जाते हैं । अनुच्छेद हिन्दी में दिये रहते हैं जिसका अनुवाद अपनी भाषा में करना होता है।

हो भाषा में शरीर  के अंगों के नाम

हो भाषा में शरीर  के अंगों के नाम

होमों ( मंणा ) , कोंजा कोंबा नुतुम

हिन्दी में शरीर के अंगों नाम    हो भाषा में शरीर के अंगों के नाम

1-  सिर                                         बोअ

2- आँख                                         मेड़

Santhali bhasha vyakaran sangya | संथाली व्याकरण संज्ञा(ञुनुम )

Santhali bhasha vyakaran sangya

संज्ञा  ( ञुनुम ) :–किसी व्यक्ति ,वस्तु आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं ।जैसे :- होड़ , गाय  मोहोन । संताली भाषा संज्ञा मुख्यतः सजीव और निर्जीव अर्थात् प्राणिवाचक और अप्राणिवाचक (वस्तुवाचक ) दो भागों में बांटी गयी है।

खोरठा भाषा में पत्र लेखन | khortha bhasha patra lekhan

खोरठा भाषा में पत्र लेखन

खोरठा में पत्र लेखन हेतु मार्ग दर्शन : पत्र लेखन एक कला है ।एक अच्छा पत्र वह होता है , जिसमें संक्षेंप में सरल भाषा अपनी बात व्यक्त की गई हो ।आप भी एक अच्छा पत्र लिख सकतें है

कुँड़ुख़ भाषा व्याकरण उपसर्ग (मुहड़ालटखु )

कुँड़ुख़ भाषा व्याकरण उपसर्ग (मुहड़ालटखु )

मुहड़ालटखु आ बकओटा तली एकदा एकअम बक ही मुहड़ा नू बरअर अदि घी मनेन बदल ई मलता बिहइत ओंदरई ।
( उपसर्ग वह शब्दांश है जो किसी शब्द के पहले आकर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाता है, उपसर्ग कहलाते  हैं ।)

  कुँड़ुख़ भाषा व्याकरण मुंज्जालटखु (प्रत्यय)

 कुँड़ुख़ भाषा व्याकरण मुंज्जालटखु (प्रत्यय)

मुंज्जालटखु (प्रत्यय) :– एका बकओटा बक ही मुंज्जा नू बरई , अदिन मुंज्जालटखु बअनर ।

    ( जो शब्दांश शब्दों के बाद लगाये जाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते है । )

खोरठा  व्याकरण उपसर्ग (उपसरग ) |khortha vyakaran upsarg

खोरठा  व्याकरण उपसर्ग (उपसरग )

जो शब्दों से पहले लगकर उनके अर्थ में विशेषता या परिवर्तन ला देतें हैं या उसके अर्थ को बदल देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं ।

JSSC NAGPURI LITERATURE AND LANGUAGE SYLLABUS

JSSC NAGPURI LITERATURE AND LANGUAGE SYLLABUS

नागपुरी भाषा साहित्य पाठ्यक्रम 1. व्याकरण – वर्ण,संज्ञा,सर्वनाम,लिंग,वचन,कारक,विशेषण,क्रिया विशेषण,अव्यय,उपसर्ग,प्रत्यय,काल, क्रिया,वाक्य,समास,अनेक शब्द के बदले एक शब्द, विलोम शब्द, समानार्थी शब्द,मुहावरे एवं कहवाते,वाक्य शुद्धि । 2. साहित्य – (क) नागपुरी लोक साहित्य – लोक गीत, लोक    कथा ,पहेली,कहावत, मुहावरे । (ख) लोक गीत – डमकच ,पावस,उदासी,फगुवा पंचरंगी, फगुवा पुछारी ,झूमर,अंगनई, लहसुआ झुमआ, सोहराई गीत । (ग) नागपुरी … Read more

नागपुरी संस्थान

नागपुरी संस्थान पिठोरिया में स्थापित है। इस संस्थान ने नागपुरी भाषा के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।

नागपुरी व्याकरण के पर्यायवाची शब्द

नागपुरी व्याकरण के पर्यायवाची शब्द

नागपुरी भाषा में हिन्दी की तरह हीं एक शब्द के कई रूपों का प्रयोग किया जाता हैं ।उसे नागपुरी भाषा में पर्यायवाची शब्द कहते हैं ।

नागपुरी व्याकरण विलोम शब्द  (  उल्टा शब्द )

नागपुरी व्याकरण विलोम शब्द  (  उल्टा शब्द )

शब्द       विलोम शब्द       शब्द         विलोम शब्द

ढाँगा           ढ़ेपचा             लम्बा                  नाटा

ढाँगी           ढ़ेपची             लम्बी                  नाटी

थुल-थुल     लिटिर-पिटिर    मोटा       दुबला-पतला

झारखंड : सामान्य जानकारी (Jharkhand : General Information)

झारखंड

गठन =  15 नवंबर, 2000 राजधानी  =  राँची जनसंख्या  = 3,29,88,134 क्षेत्रफल  = 79,710 वर्ग किमी. कुल ज़िले  =    24 स्थान उच्च न्यायालय   =   राँची राजकीय पशु : हाथी राजकीय पुष्प : पलाश राजकीय पक्षी : कोयल राजकीय वृक्ष : साल संथाल जाति की प्रमुख लोककला : जादोपटिया जनजातीय पर्व : सरहुल सामान्य जानकारी   झारखंड … Read more

खोरठा भाषा में प्रत्यय ( परतइय )|khortha bhasha mien pratyay

खोरठा भाषा में प्रत्यय

जो शब्दांश शब्दों के बाद लगकर उनके अर्थ में विशेषता या परिवर्तन ला देते हैं या उसके अर्थ को बदल देते है ,प्रत्यय कहलाते हैं।

मुण्डारी व्याकरण की भाषा और अक्षर | होड़ो जगर मुंडि रेअः जगर ओड़ोः बनि 

मुण्डारी व्याकरण

होड़ो जगर मुंडिं  देवनागरी लिपि रे आद् होड़ो जगर आते हिनदी रे उलथा इदि अकना ।हिनदी पनढ़वको ,ओकोए होड़ो जगर काको इतुनवा आद् होड़ो होनकोएओ खलते पढ़व अर बुजव को दड़िअः ।

झारखण्ड में मौर्य साम्राज्य

अर्थशास्त्र के संरक्षक इतिहासकार और रामशास्त्री के अनुसार झारखंड क्षेत्र चंद्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य में शामिल था। परोक्ष अथवा प्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र निवास करने वाली आटवीं जातियों पर अशोक का नियंत्रण स्थापित था। अशोक के 13वें शिलालेख में आटवीं के नाम का उल्लेख हुआ है। 

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